Wednesday, August 15, 2012

ACK-234-Sardar Bhagat Singh


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सरदार भगत सिंह
ऐसे महान क्रन्तिकारी के बारे में कुछ भी कहना सूरज को दिया दिखने जैसा है, और मै मूर्ख ये कोशिश करने जा रहा हूँ , इश्वर मेरी मदद करे और मेरे मित्र इसके लिए मुझे माफ़ करें ,वो भावना जो देश के लिए इनके दिल में थी वो न मै कभी महसूस कर सकता हूँ और न ही कभी वो भावना मुझ में आ सकती है, ऐसे महान क्रन्तिकारी जिनको देश के लिए जान देने का जूनून सवार था, वो जूनून और वो देशभक्ति कहाँ से लाऊं . मै तो उस समय की देन हूँ जिस समय में देश से ज्यदा लोग अपने बारे में सोचते है, देश का पैसा विदेश में जमा करते है,पैसे के लिए अपने आप को बेच देते है. जनता को कीड़े की तरह समझते है और हम आम जनता को तो गुलामी की आदत पड़ गयी है . पहले अंग्रेजो की गुलामी की और अब इन सफ़ेद कुत्तों की गुलामी कर रहे है. और ऐसे न जाने कब तक करते रहेंगे. हम तो इन महान लोगो के बारे में बात करने के लायक भी नहीं है.

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