Friday, June 23, 2017

Manoj Comics-954-Murdon Ka Bag


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मनोज कॉमिक्स-९५४-मुर्दों का बाग़
 मनोज कॉमिक्स की एक और बेहतर कॉमिक्स। ये कॉमिक्स भी अभी तक कही अपलोड नहीं हुयी है। आज इसे अपलोड कर रहा हूँ। कॉमिक्स कहानी के नज़र से भले ही बहुत अच्छी न हो पर कुछ नयापन जरूर है। चित्रों का सजीव होना इस कॉमिक्स की विशेषता है। कई चित्र ऐसे है की लगेगा की अभी जिन्दा हो जायेंगे। कहानी के सम्बाद के साथ जब आप चित्रों को देखेंगे तो आप वाह कह उठेंगे। ख़ास तौर पर एक चित्र जिसमे उसके सम्बाद "मैं कोई डायन नहीं हूँ" के चेहरे के भाव को देख कर दिल दहल जाता है। पढ़ कर देखे। ऐसे चित्रों की भरमार है इस कॉमिक्स में पर कहानी का मज़ा ख़राब न हो इसलिए ज्यादा लिख नहीं पाउँगा।
 कहानी सुरु होती यही एक बाग़ के दिवार टूटने से। उसके बाद जो उस बाग़ में जाता है अगले दिन उसकी लाश किसी पेड़ से लटकती मिलती है। कारण किसी को समझ में नहीं आता है तो गांव वाले उस बाग़ को पूरी तरह से बंद कर देते है। इसके बाद क्या होता है ये तो आप को कॉमिक्स पढ़ने के बाद ही पता चलेगा।
 जैसा की आप सभी जानते है की मेरा कॉमिक्स के प्रति लगाव है। जिसके के कारण मैंने कॉमिक्स स्कैन और अपलोड करना शुरू किया था। फिर ब्लॉग बनाया जिससे कॉमिक्स की अपलोडिंग को एक नया विस्तार मिले और ये हमेशा के लिए डिजिटल फॉर्मेट में सेव हो जाये।
आज की तारीख में मेरे पास मनोज कॉमिक्स लगभग पूरी है। राज कॉमिक्स भी लगभग पूरी है। पैसे की तंगी के कारण तुलसी कॉमिक्स बेचनी पड़ी नहीं तो वो भी काफी थी। राधा कॉमिक्स , पवन कॉमिक्स, नीलम , नूतन , प्रभात ,इंद्रजाल , चित्रभारती आदि। कुल मिला कर १५००० से ज्यादा कॉमिक्स। इंग्लिश कॉमिक्स और नावेल भी जोड़ दूँ तो पता नहीं और कितनी हो जाएँगी।
मेरा कॉमिक्स स्कैन और अपलोड करना लाइन ऑफ़ बिजनेस नहीं है मै टीचर हूँ और अपने परिवार का पेट पालने भर की कमा लेता हूँ। मैं ये भी अच्छे से जनता हूँ की मै इन कॉमिक्स को बहुत दिन तक संभाल कर नहीं रख पाउँगा इसलिए इन्हे स्कैन और अपलोड कर रहा हूँ और आगे भी करता रहूँगा। अगर किसी को ये लगता है कि ब्लॉग मेरी कमाई का जरिया है तो उसे अपने दिमाग का इलाज़ करवाना चाहिए। मनोज कॉमिक्स पूरी तरह अपलोड करना मेरा सपना है और ये जरूर पूरा होगा।
 फिर जल्द ही नयी कॉमिक्स के साथ दुबारा मिलते है।

Monday, June 19, 2017

Manoj Comics Visheshank-34-Trikaaldev Aur Matkkasheesh


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मनोज कॉमिक्स विशेषांक -३४ -त्रिकालदेव और मटकाशीश
  ये कॉमिक्स भी उन कॉमिक्स में से है जो कही अपलोड नहीं हुई है। वैसे तो मनोज कॉमिक्स के लगभग सभी विशेषांक अपलोड किए जा चुके है। जो कुछ बचे है ये उनमे से एक था। त्रिकालदेव का चरित्र ही-मैन से प्रभावित था जैसे की भोकाल है। पर एक बात तो माननी पड़ेगी की कहानी के लिहाज़ से ये भोकाल पर भारी था। मै अगर अपनी बात करूँ तो बस इतना कह सकता हूँ कि अगर भोकाल और त्रिकालदेव में से कोई एक कॉमिक्स पढ़नी हो तो त्रिकालदेव पढूंगा।
 कहानी के लिहाज़ से ये कॉमिक्स बेहतर है। विशेषांक को स्कैन करना हमेशा कठिन होता है। एक तो पेज ज्यादा होते है ऊपर से उनके पिन खोलने का मन नहीं करता। पर जैसे की मेरी आदत है कि कॉमिक्स ऐसी स्कैन होनी चाहिए कि फिर किसी को दुबारा स्कैन न करना पड़े।
 कहानी शुरू होती है पाताल के राजा मकड़ा मंकोट से जो शैतान की पूजा के लिए इंसान की बलि चढ़ाता है। अगर आप त्रिकालदेव की कॉमिक्स पढ़ रहे है तो आप ओनस और थिम्पू से जरूर परचित होंगे। "त्रिकालदेव और ओसका" में आपने उनके त्रिकालदेव से मिलने की घटना के बारे में पढ़ा होगा। पर वो कौन है और उनको अपना ग्रह क्यों छोड़ना पड़ा ये आप इस कहानी में जान पाएंगे। त्रिकालदेव अपने इन मित्रों की कैसे मदद करता है। ये ही इस कहानी का मूल आधार है।
 बहुत दिन हो गए मैंने अपने विचार यहाँ प्रकट नहीं किये। इसके कई कारण है। पर आज मै कुछ न कुछ जरूर लिखूंगा। पहले लिखने से पहले मै ध्यान देता था की लोगो को अच्छा लगेगा या नहीं लगेगा। अब सिर्फ ये ध्यान देता हूँ कि मुझे अच्छा लगेगा की नहीं लगेगा।
 आज कल देश मुख्यता दो विचारधारा में बटा है। या तो आप मोदी भक्त / देशभक्त /साम्प्रदायिक है या तो आप मोदी विरोधी/देशद्रोही/सेक्युलर है। इसका मुख्या कारण मुसलमानो का कॉग्रेस के समय में मिलने वाला विशेषाधिकार था जो अब नहीं मिल रहा है। आप भारत के नागरिक है। इस कारण जितना अधिकार आप का बनता सरकार चुनने का उतना ही हमारा भी है। अगर हमने अपनी पसंद की सरकार चुन ली है तो उसका आदर करें। इन सबसे ज्यादा कुत्तें तो नेता है। मुसलमान वोट एकजुट है तो उसको पाने के लिए हिन्दुओ को मारने को भी तैयार हो जाते है। इन वोट के लिए भारत मुर्दाबाद भी चलेगा, कश्मीर की आज़ादी भी चलेगा। सेना की बुराई भी चलेगी। इन सब के लिए मुशलमान दोसी है। जो देश विरोधी बात करता है आप उसको वोट देते हो तो आप ही दोसी होंगे। पर अब लोग सेक्युलर होने का मतलब समझने लगे है। यदि आप ने इन सब का साथ न छोड़ा तो फिर हम जैसे हिन्दू आप का साथ छोड़ देंगे। फिर ऐसी सरकार बनेगी जो शिवसेना व बजरंगदल की होगी जो आप को देश में जीने नहीं देगी। मुख्यधारा में लौटे। पुलिस में जाएँ। सेना में जाएँ और जो सरकार देश की जनता ने बनायीं है उसका आदर करें। सिर्फ बुराई करने से बचे। अगर गलत को गलत कहे तो सही को सही भी कहें।
 ये सभी मेरे अपने विचार है और मेरे अपने ब्लॉग पर है। अगर आप असहमत है तो शालीनता से अपनी बात रखे। आज के लिए इतना ही। जल्द ही मिलता हूँ नयी कॉमिक्स के साथ

Manoj Comics-944-Viraan


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मनोज कॉमिक्स -९४४-वीरान 
ये कॉमिक्स भी उन कॉमिक्स में से है जो कही अपलोड नहीं हुई है। वैसे तो कॉमिक्स मैंने अपने सेट - वाइज अपलोड में तो अपलोड कर दिया है। पर इसकी बड़ी फाइल यहाँ अपलोड कर रहा हूँ जिससे जो हाई क्वालिटी में कॉमिक्स पढ़ना चाहते है उन्हें भी डाउनलोड करने को मिल जाये। कहानी इसकी ठीक-ठाक ही है। जैसा मैंने नाम से अंदाज़ा लगाया था की ये वीराना फिल्म की तरह किसी डरावनी जगह पर आधारित कॉमिक्स होगी। पर ये कॉमिक्स एक बच्चे के नाम पर आधारित है।
कहानी में कुछ भी नहीं है। कहानी शुरू होती है वीरान नाम लेते हुए एक भूत द्वारा क़त्ल से। एक के बाद एक क़त्ल से। भूत वाली कहानियों में यही होता है। क़त्ल की वजह भी बहुत ही साधारण है। कुछ भी नया नहीं लगा मुझे। आप इसे पढ़कर कर देखे शायद आप को ये कॉमिक्स अच्छी लग जाये।

Saturday, June 3, 2017

Manoj Comics-924-Mai Maut Laya Hun


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मनोज कॉमिक्स-९२४-मैं मौत लाया हूँ
 मनोज कॉमिक्स में एक और हॉरर कॉमिक्स। कुछ ऐसा रहा है मेरे साथ एक हॉरर कॉमिक्स ही अपलोड करना मेरे हिस्से में आ रहा है। जैसा की आप सभी जानते है की मनोज कॉमिक्स को सेट वाइज ऑरेंज कर रहा हूँ। उन कॉमिक्स को बहुतों ने स्कैन किया है जिनमे से मै भी हूँ पर वो सभी कॉमिक्स स्कैन और अपलोड बिखरी हुयी है। जिन्हे पहले मोहित भाई ने अर्रेंज करने की कोशिश की थी अब मै कर रहा हूँ। अब जो कॉमिक्स कही भी उप्लोडेड नहीं है उन्हें स्कैन और अपलोड करके सेट पूरा कर रहा हूँ।
ये कॉमिक्स भी मेरी जानकारी में अभी तक कही भी उप्लोडेड नहीं है। प्रया ऐसा देखा गया है की सुपर हीरो की कॉमिक्स को सबने पहले अपलोड किया परन्तु अन्य कॉमिक्स को किसी ने उपलोड नहीं किया है। यही कारण है की ज्यादातर हॉरर कॉमिक्स अपलोड नहीं है जिन्हे मुझे अपलोड करना पड़ रहा है।
ये कॉमिक्स भावना से ओतप्रोत है। एक बिगड़ा नाती अपने नाना के लिए गलत धंधे छोड़ देता है। पर जैसा की हम सब को पता है की अपराध के रस्ते पर जाना तो आसान है निकलना बहुत कठिन। इस का क्या परिणाम निकलता है ये तो आप कहानी पढ़ कर ही जान पाएंगे। कहानी अच्छी है और चित्र भी बहुत बेहतर बने है। एक पढ़ने लायक चित्रकथा।
 फिर जल्द ही मिलते है एक नयी चित्रकथा के साथ। .......

Tuesday, May 30, 2017

Manoj Comics-919-Maut Ki Gond Me


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मनोज कॉमिक्स-९१९-मौत की गोद में
ये उस समय की कॉमिक्स है जब कॉमिक्स के नाम पर कुछ भी छापा जा सकता था। कॉमिक्स की बिक्री अपने चरम पर थी। कहानी के लिहाज़ से उस समय कॉमिक्स पर बहुत ज्यादा यकीन करना कठिन था। ऐसे समय पर छपी इस कॉमिक्स से भी ज्यादा उम्मीद करना बेमानी होगा। जैसा की मै पहले भी लिख चूका हूँ जब भी भूतों पर कहानी लिखी जाती थी तो लेखक के पास देने को कुछ होता नहीं था। वही घिसी-पिटी कहानी की कुछ लोगो ने मिल कर किसी को मारा और फिर शुरू हुआ आत्मा द्वारा बदला लेने की सिलसिला। सच कहु तो पहले इस तरह की कहानिया बहुत पसंद आती थी पर फिर समय के साथ इनके एकरूपता के कारण इन से मन ऊबने लगा। पर जैसा की हम जानते है की मनोज कॉमिक्स से बेहतर अपने पाठको का मन तो आज तक राज कॉमिक्स वाले नहीं जान पाए।
 इस कहानी में आप को वो देखने को मिलेगा।इस तरह की कहानियों में भी मनोज कॉमिक्स वालों ने एकरूपता नहीं आने दी थी। पढ़ेंगे तो आप को एक बात का अंदाजा जरूर लग जायेगा। आप इस कॉमिक्स का आनद लीजिये जल्द ही एक और नयी कॉमिक्स के साथ मिलते है।

Tuesday, December 6, 2016

Nutan Comics-77- Jawaharaat Ki Lashen


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नूतन कॉमिक्स-७७-जवाहरात की लाशें
 सर्वप्रथम तो इस कॉमिक्स के कुलविंदर सिंह सोना जी को तहे दिल से धन्यवाद। नूतन कॉमिक्स अपने आप में एक बड़ा प्रकाशन हुवा करता था। इनकी कॉमिक्स में मेघदूत और भूतनाथ की कॉमिक्स की बहुत मांग हुवा करती थी। जिसका एक बहुत बड़ा उदहारण प्रस्तुत कॉमिक्स है। ये कॉमिक्स वैसे तो अमर-अकबर सिरीज़ की है पर कवर पेज पर भूतनाथ का चित्र बना हुआ है। इस कॉमिक्स के कवर पर भूतनाथ का चित्र बना कर भूतनाथ की माग को भुनाने की कोशिश की गयी है।
 कहानी के लिहाज़ से ये कॉमिक्स अच्छी है। सरल कहानी और अच्छे चित्रों से सजी इस कॉमिक्स को भूतनाथ के नाम के बैशाखी की जरुरत नहीं थी।
 कहानी सुरु होती है अमर-अकबर के एक तालाब में मछली पकड़ने से। जहाँ मछली के काटे में लाश फसती है। जब दोनों उस बात की जानकारी देने के लिए इंस्पेक्टर बलबीर के पास जाते है। इंस्पेक्टर के साथ वापस पहुँचने पर लाश गायब होती है। आगे दोनों क्या करते है ये तो आप कॉमिक्स पढ़ कर ही जान पाएंगे।
 कहानी अच्छी है। पढ़ने में मज़ा आएगा।
 आज कल अगर कोई बात सबसे ज्यादा चर्चा में है तो वो है नोट बंदी। सरकार के नोट बंदी के बाद देश में पैसे को लेकर हालात अभी भी पूरी तरह से ठीक नहीं है। पर जो भी हो मैं इस नोट बंदी का पूरी तरह समर्थन करता हूँ। कोई कुछ भी कहे पर सरकार का इरादा १०० % सही है। एक बात मैं यहाँ पूरी तरह से कह देना चाहता हूँ। कि मैं जन्म से हिन्दू हूँ और मुझे अपने धर्म पर गर्व है। और मैं मैंने धर्म की बात मौके-बेमौके करता रहता हूँ। जिसको इस बात से परेशानी है वो मुझ से अलग हो सकता है। मेरे विचार भारतीय जनता पार्टी से भी मिलते है तो मेरे लेखों में उनके प्रति मेरा झुकाव साफ़ दिखाई दे जायेगा। मैं राजनीति नहीं करता इसलिए मुझे किसी के नाराज़ होने नहीं होने से कोई फर्क नहीं पड़ता। मेरे विचारों से आप असमत होने पर सभ्य तरीके से अपना विरोध दर्ज करवा सकते है। मैं फेसबुक प्रोफाइल से कभी भी किसी को टैग नहीं करता (अनजाने में हो जाये तो नहीं कह सकता) इसलिए अगर आप के कोई विचार मेरी विचारधारा से मेल नहीं करता तो आप मुझे टैग न करें। आप अपनी प्रोफाइल में कुछ करें मुझे कोई फर्क नहीं पड़ता पर मुझे मेरी विचारधारा के विरुद्ध टैग न करें। मैं अपने विचार सिर्फ अपने फेसबुक पेज या फिर अपने ब्लॉग पर लिखता हूँ। आप को अच्छा लगे तो कुछ कहे न लगे तो विरोध सभ्य तरीके से दर्ज करें। और अगर आप ऐसा करने में असमर्थ रहते है तो मुझ से भी किसी सभ्यता की उम्मीद नहीं रखे। नोट बंदी पर जैसा रिएक्शन कुछ लोगो का आ रहा है वो वाकई निराशाजनक है। ममता बैनर्जी समझ में नहीं आता तो वेस्ट बंगाल की CM है या बंगादेश देश की PM . इनका और केजरीवाल का रिएक्शन तो ऐसा है जैसे इनकी नकली नोटों की प्रिंटिंग प्रेसः बंद हो गयी हो। गटिया राजनीति की ये पराकाष्टा है। ये दोनों ये भूल रहे है की ये तभी तक है जब तक हमारा देश है। क्यों भारत को सोमालिया और इराक बनाने की कोशिश हो रही है। नोटबंदी से परेशानी है तो उसे दूर करने का उपाय बताएं। बुजुर्गों को परेशानी ज्यादा है उनके लिए हफ्ते के एक दिन हो जिस दिन सभी बैंक सिर्फ उनके लिए काम करें। कुछ ATM सिर्फ शादी वालों के लिए ही हों। कुछ बैंक सिर्फ मरीज़ों के घरवालों के लिए ही काम करें। ऐसे कई सुझाव जो सरकार को दिए जा सकते है। पर नेताओं को तो लगता है की जनता को और परेशान करों कि वो हमारी तरफ हो जाये। सच कहूँ तो जब से मैंने जब होश संभाला तो कांग्रेश तो पसंद करता था राजीव गाँधी के कारण। फिर वाजपई जी और अब मोदी जी को पसंद करता हूँ। मुझे इस बात से फर्क नहीं पड़ता की नेता मेरी सुनता है की नहीं मुझे सिर्फ इस बात से फर्क पड़ता है कि वो सिर्फ एक की सुनता है। जैसे मायावती के राज में होता है कि अगर कोई दलित आप की शिकायत कर दे तो चाहे आप सही हो या गलत आप को सजा मिल कर रहेगी। वही मुलायम सिंह राज में है अगर आप यादव या मुस्लिम है तो फिर आप गलत हो ही नहीं सकते। मेरे पडोसी की एक छोटे यादव नेता से जान पहचान है। जिसका फ़ायदा उठा कर उन्होंने आधी सड़क पर स्लेप बनवा लिया है। सभी जगह शिकायत करने के बाद भी कुछ नहीं होता। नगर पंचायत ने लिखित में स्लेप तोड़ने को दिया फिर भी कुछ नहीं हुवा क्योंकि यादव जी का हाथ है। मुझे ऐसे लोग नहीं चाहिए। मुझे ऐसे लोग चाहिए तो सही को सही और गलत को गलत कहे। फिर मिलता हूँ एक नयी कॉमिक्स के साथ तब तक के लिए विदा।

Sunday, November 6, 2016

Indrajaal Comics-106-HeronBhara Kutta



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इंद्रजाल कॉमिक्स-१०६-हीरों भरा कुत्ता
 जैसा की मैं पहले भी लिख चूका हूँ कि इंद्रजाल कॉमिक्स मुझे कभी भी लुभा नहीं पाई इसी कारण कभी इसका कलेक्शन करने का मन भी नहीं हुआ। इसलिए इसकी बहुत कॉमिक्स मेरे पास होने का तो सवाल ही नहीं उठता है। अब अगर कलेक्शन करने का मन भी करे तो संभव नहीं है। इसकी कीमत के कारण। ये कॉमिक्स मेरे एक जानने वाले दूकानदार ने बेचने के लिए मुझे दिया था तो बेचने से पहले मैंने इसे स्कैन कर लिया। वैसे तो ये कॉमिक्स पहले से कही अपलोडेड है। फिर भी मैं इसे अपलोड कर रहा हूँ।
आप ने एक बात जरूर नोट की होगी की आगस्ट से अक्टूबर तक काफी कॉमिक्स अपलोड की है। कारण सीधा सा था इन बीच मैं फिर से बेरोज़गार हो गया था। अब तो ऐसा लगता है कि जैसे की सारा जहान लुटेरों और बेईमानो से भरा हुआ है। हर किसी को अपने फायदे के अलावा कुछ भी नज़र नहीं आता। लोग अपने एक रूपये के फायदे के लिए आप का हज़ार का नुकशान करने को हमेशा तैयार रहते है। एक साल में अपने साथ दो बार एक जैसे आचरण के कारण मैं अभी तक सदमे में हूँ। समझ में नहीं आ रहा है की मेरे आचरण में परेशानी है या फिर ये दुनिया रहने लायक नहीं है। जो भी हो मुझे अब इस उम्र में अपने आप को बदलना सम्भव नहीं लगता है। और दुनिया को मैं बदल नहीं सकता। देखते है जिंदगी आगे कैसे चलती है।
 जैसा की आप सब को पहले से ही पता है की पिछली साल अक्टूबर २०१५ को मेरे स्कूल सेंट अंटोनी इंटर कॉलेज से जाना पड़ा था। जिसके कारण मुझे कही तो नौकरी करनी ही थी। पर बीच सेक्शन में नौकरी मिलना असंभव ही था। पर मैंने जिस तरह से उन दिनों नौकरी ढूंढी वो भी कमाल ही था। हर रोज़ काम से काम ५ स्कूल में सी.वी ड्राप करना मेरा हर वर्किंग दिन का काम था। कई स्कूल ऐसे थे जहाँ सिलेक्शन होने के बाद भी फर्स्ट चॉइस न होने के कारण हो नहीं रहा था। न्यूज़ पेपर की नौकरियों को तो मैंने ऐसे भरा था की मुझे ये भी याद नहीं रहता था की कहाँ -कहाँ मेल किया है और कहाँ नहीं। फिर एक दिन रात को लगभग ९:२० पर मिस्टर अरुण सिंह का फ़ोन आया उन्होंने मुझे अपने स्कूल अरुणोदय पब्लिक स्कूल जो की बाराबंकी में है उसके लिए ऑफर किया। फ़ोन पर ही पूरा इंटरव्यू ले लिया। मेरी नॉलेज से वो काफी प्रभावित थे। स्कूल मेरे घर से ४० किलोमीटर दूर था तो मेरा ज्वाइन करने का मन नहीं था। मुझे सिर्फ एक बार मिलने के लिए राज़ी किया गया। वहां जाने पर मुझे किसी भी तरह ज्वाइन करवाने की तैयारी की गयी थी। कम से कम जितनी सैलरी मुझे चाहिए थी उतने के लिए हाँ कर दिया। मुझे और टीचर्स से ३० मिनट पहले छोड़ने को भी तैयार हो गए। मुझे नौकरी चाहिए भी थी तो मैंने ज्वाइन कर लिया। फिर उन्होंने मेरे से स्कूल अफ्फिलिएशन के लिए कुछ और ट्रैनेड टीचर्स को देने की रिक्वेस्ट की। तो मैंने उन्हें अपने साथ बी.एड किए तीन और अपनी वाइफ के डोकोमेँट दे दिए जिससे स्कूल को जल्दी से अफ्फिलिएशन मिल सके। मेरे मित्रों में से दो ने ही स्कूल ज्वाइन किया। बाकी दो अगर अफ्फिलिएशन के लिए टीम आती तो वो स्कूल में आ जाते।
 एक महीना अच्छे से चला पर जब सैलरी आयी तो पता चला १० % कटौती होती है जिससे कोई बीच में स्कूल छोड़ कर न जा सके। उन्ही बीच मेरा जय पुरिया स्कूल में हो गया। सैलरी दोनों जगह एक ही थी तो मैंने अरुण सिंह से बात की। अगर आप को मुझ से कोई प्रॉब्लम हो तो मुझे बता दें। मेरा जैपुरिया में हो गया है मैं वहां चला जाऊंगा। यहाँ तो मैं बिना कटौती के ही काम कर सकता हूँ। जैसा की मुझे उम्मीद थी उन्होंने मेरी सैलरी की कटौती वापस ले लिए और कुछ तो कटौती के नाम पर ३% ही कटौती रह गयी। मुझे भी लगा एक महीने से मैं यहाँ पर हूँ। जल्दी स्कूल बदलना भी ठीक नहीं है। तो मैंने वही रुकने का फैसला कर लिया। फिर स्कूल में मैनजमेंट में परिवर्तन सुरु हुए। प्रिसिपल बदली और अरुण सिंह ने अपने रिस्तेदार को स्कूल का एडमिन बना दिया। मिस्टर अरुण सिंह केमिकल इंजीनियर है दुबई में तो आल्टरनेट महीने ही स्कूल में रह पाते है। क्योंकि ये परिवर्तन सीधा मेरे से सम्बन्ध नहीं थे इसलिए मुझे इससे कोई फर्क नहीं पड़ना था। पर ये परिवर्तन धीरे-धीरे असर दिखाने लगा। प्रिसिपल अनुपमा ने अपने अनट्रेंड टीचर्स को रखने के लिए पुराने टीचर्स को निकालना शुरू कर दिया। कोई भी तर्क दे कर। मेरे लिए ये कोई नहीं बात तो थी नहीं। चुप रहना ही ठीक लगा। जुलाई ३१ को माँ की तबियत ठीक न होने के कारण स्कूल नहीं जा पाया तो मेरे मोबाइल पर मेरा टर्मिनेशन लेटर आ गया की आप प्रिंसिपल से की गयी बात बच्चों से शेयर करते है। मज़ेदार बात तो ये थी की ३० को जब मैं प्रिंसिपल से मिला था उसके बाद मैं उस क्लास में गया ही नहीं था जिस का नाम उन्होंने लेटर में दिया था। क्योंकि उस क्लास में मेरा पीरियड ही नहीं था। फिलहाल मैंने इनकी भी शिकायत सी.बी.यस.सी को,लेबर कोर्ट में , सी यम को और भी कई जगह कर दी है। पर हमारे देश का घटिया कानून है इसमे शिकायत करता को ये साबित करना पड़ता है कि उसकी शिकतायत सही है। शोषण करने वाला हमेशा सही ही होता है। मेरे पास ५ महीने के बैंक रिकॉर्ड है जिसमे स्कूल के द्वारा दी गयी सैलरी है। बच्चो के वॉट्सआप के मैसेज है जो ये साबित करता है की मैं उनकी क्लास में नहीं गया था। और उन्हें मेरी क्लास में पढ़ना पसंद था। लेवर कोर्ट को कंप्लेन किये हुए २ महीने से ज्यादा हो चूका है वहां से कोई उत्तर नहीं है। बाकि सब भी मौन है।सी एम और पी यम की तरफ से सिर्फ कंसर्न डिपार्टमेंट को केस ट्रांफर करने की ही खबर है। एक्शन अभी तक कोई नहीं है। यहाँ तक जो मेरा पेंडिंग आमउंट स्कूल से आना था उसे देने के एक हफ्ते बाद मेरे अकाउंट से निकलवा लिया। वो भी स्टेट बैंक ऑफ़ इंडिया जैसे बैंक से। कंप्लेन का कोई सही उत्तर बैंक भी नहीं दे रहा है। ये समय मेरे लिए बहुत घटिया गुज़रा है। मेरा मन कही भी काम करने का नहीं था। पर एक शुभचिंतक के कारण एक बहुत अच्छे स्कूल में २४ सितम्बर को ज्वाइन किया है। पर अब कुछ अच्छा नहीं लगता है। जिन सब के लिए मैंने इतने दिन काम किया। न के बराबर लेट होना चाहे १० किलोमीटर दूर हो चाहे ४० किलोमीटर दूर। एब्सेंट तो होना ही नहीं होता है मुझे। क्लास से कभी शायद ही कंप्लेन हो।शायद ही क्लास का कोई बच्चा हो जिसे मुझसे पढ़ाई के मामले में फ़ायदा न पंहुचा हो। फिर भी बार-बार मेरे साथ ऐसा क्यों ? छोडूंगा तो नहीं मैं इनको भी। पर प्राइवेट नौकरी करने वालों से अच्छे ईद के बकरे होते है जो एक दिन ही दर्द झेलते है प्राइवेट नौकरी वाले तो रोज़ हलाल होते है।

Wednesday, October 26, 2016

Manoj Comics-898-Lashon Ki Mala


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                                                                              Scan by-Manoj Pandey
                                                                              Edited by-Shrichand Chavan
मनोज कॉमिक्स-८९८-लाशों की माला
 ये कॉमिक्स कम से कम भूतों से सम्बन्ध नहीं है। और ये कॉमिक्स ९०० तक की अपलोडिंग की आखरी पेंडिंग भी है। इसे एडिट श्रीचंद जी ने किया है। कहानी अच्छी है और जो एडवेंचर को पसंद करते है उन्हें अच्छी लगेगी। चित्र अच्छे अच्छे बने है।
 कहानी शुरू होती है एक जंगल में तस्करों की मुठभेड़ से। उसके बाद बचा हुवा तस्कर जंगल में भटक जाता है। जहाँ उसे एक कीमती माला नज़र आती है जिसकी रखवाली एक पुजारी कर रहा होता है। पुजारी का सारा तांत्रिक ज्ञान भी तस्कर को माला ले जाने से रोक नहीं पाता है। इस प्रयास में तस्कर के हाथ पुजारी मारा जाता है। जो वो श्राप देता है की जिसके गले में माला होगी उसकी मौत हो जाएगी। इसके  बाद  उस माला ने क्या क्या गुल खिलाए ये तो आप को कॉमिक्स पढ़ की ही पता लगेगा।
 फिर जल्द ही दुबारा मिलते है।