Sunday, May 19, 2013

Star Comics-02



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स्टार कॉमिक्स 02
 ये कॉमिक्स से ज्यदा पत्रिका है। पर जो कुछ भी है पढने में बहुत ही मजेदार है यही कारण था कि एक सिरीज़ के बीच में इसे अपलोड किया उम्मीद है आप सब को ये बहुत पसंद आएगी।
 छुट्टियाँ शुरू हो चुकी है इसलिए आप आप सब को कॉमिक्स के लीये ज्यदा इंतज़ार नहीं करना पड़ेगा। अभी कुछ देर पहले एक आर्टिकल लिखा था की तभी मोज़िला क्रैश हो गया और साथ में वो आर्टिकल भी. अब और लिखने का मन नहीं कर रहा है पर कॉमिक्स पोस्ट कर ही रहा हूँ क्योकि मोज़िला की गलती की सजा मै आप सब को नहीं दे सकता।
पर इतना जरुर है की वो आर्टिकल आप को अगले पोस्ट में पढने को जरुर मिलेगा और भी बेहतर तरीके से लिखा हुआ।
 तब तक के लिए अलविदा जल्द ही दुबारा मिलते है ...................

Saturday, May 4, 2013

Indrajaal comics-Vol-26-02-Rahesymaye Joda



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इंद्रजाल कॉमिक्स--Vol-26-02-रहेस्यमय जोड़ा
 इस कॉमिक्स का पहला भाग आप सब ने पढ़ ही लिया होगा पर अभी इसका तीसरा भाग भी आना है और उम्मीद है उसे जल्दी से अपलोड करने में जरुर सफल हो जाऊंगा।इंद्रजाल कॉमिक्स में ये परेशानी हमेशा से रही है की वो एक कॉमिक्स दो-दो कहानी देते थे और दो और तीन भाग के साथ जिससे उनकी बिक्री बनी रहे यहाँ भी यही लगता है कहानी को जबरदस्ती तीन कॉमिक्स में खीचा गया है वरना ये कहानी दो में तो जरुर पूरी हो जाती। लेकिन जो है वो तो है ही और हमें इसे ऐसे ही लेना होगा।
 फिलहाल आप इस कहानी का दूसरा भाग पढ़े तब तक जल्दी से इसका तीसरा भाग स्कैन और अपलोड करने की कोशिश करता हूँ और साथ में एक बाल पॉकेट बुक्स भी अपलोड करने की कोशिश करूँगा। जल्दी से दुबारा मिलते है ...............

Tuesday, April 23, 2013

Indrajaal comics-Vol-26-01-Rahesymaye Joda


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इंद्रजाल कॉमिक्स--Vol-26-01-रहेस्यमय जोड़ा
 इंद्रजाल कॉमिक्स, हिंदी कॉमिक्स प्रकाशन का पहला कॉमिक्स प्रकाशन। यही कारण है कि इस कॉमिक्स प्रकाशन का संग्रह 90% हिंदी कॉमिक्स संग्रहकर्ता करना चाहता है।(मै उन 10% में से हूँ ). इस कॉमिक्स प्रकाशन ने मुझे कभी भी ऐसा आकर्षित नहीं किया की मेरा मन इनका संग्रह करने के लिए पागल हो जाए। संग्रह करने के लिए अगर किसी प्रकाशन ने मुझे पागल बनाया था तो वो है राज कॉमिक्स जिसके नागराज और सुपर कमांडो ध्रुव की कॉमिक्स का संग्रह मैंने पागलों की तरह किया। यहाँ तक इन दोनों की एक कॉमिक्स के लगभग ५-५ कॉमिक्स होगी। बस नागराज और सुपर कमांडो ध्रुव की कॉमिक्स हो तो मुझे ये फर्क नहीं पड़ता है की वो कॉमिक्स मेरे पास है की नहीं मै उन्हें खरीद ही लेता हूँ।
उसके बाद मनोज कॉमिक्स में "टोटान","विध्वंस","जटायु","आक्रोश", और "राम-रहीम", की कॉमिक्स भी मैंने पागलों की तरह से ढूढ़- ढूंढ़ कर इकट्ठी की। बाकी का तो ऐसा है की मिल गई तो संग्रह हो गया और नहीं मिला तो कोई बात नहीं है। हाँ इतना जरुर रहा की संग्रह में आने के बाद उन कॉमिक्स से भी मुझे वही प्यार रहा जो मेरी मनपसंद से था पर पैसा देते समय मैंने उन्हें उतना प्यार कभी भी नहीं दिया होगा और ना ही आगे ऐसा करने का कोई इरादा है।
 हाँ कुछ लोगो ने मेरी इस आदत का गलत मतलब लगाया था और उन कॉमिक्स की मांग की। पर मेरे लिए ये बात कुछ ऐसी ही है जैसे की आप नहीं चाहते की आप का अभी कोई बच्चा हो पर अगर हो जाये तो आप उसे किसी भी बच्चे से कम प्यार नहीं देते और कभी कभी ज्यदा ही प्यार देने लगते है। संग्रह में आने के बाद वो कॉमिक्स मेरे लिए बाकी कॉमिक्स की तरह ही प्यारी है और मैं उन्हें किसी को देने में उसी तरह से असमर्थ महसूस करता हूँ,जैसे अपनी मनपसंद कॉमिक्स को देने में करता हूँ।
 जैसा की आप सब को पता ही होगा कि आजकल मै बुरी तरह से व्यस्त हूँ। मेरा बच्चा भी अब स्कूल जाने लगा है वो भी मेरे ही साथ,उसके ले जाना और फिर ले आना। और फिर उसके बाद कोचिंग के लिए दुबारा जाना बहुत थका देने वाला काम है। स्कूल सुबह ७:१५ से लगता है पर एक एक्स्ट्रा क्लास लेने के कारण ७:00 स्कूल पहुचना होता है और स्कूल मेरे घर से १० km है मतलब ६:३० पर घर छोड़ना,और १:०० बच्चे को लेकर वापस घर और फिर ३:०० बजे से वापस १५ km घर-घर जाकर पढ़ना जो की रात के १०:०० बजा देता है। उसके बाद कुछ भी करने की हिम्मत नहीं पड़ती , कॉमिक्स स्कैन करना तो दूर की बात है।
मै इस तरह की जिन्दगी का आदी भी नहीं था इसलिए थकान कुछ ज्यदा महसूस हो रही थी पर अब मुझे कुछ आदत सी पड़ने लगी है और स्कूल में काम करने का जो सबसे बड़ा फ़ायदा है वो ये की वहां छुट्टियाँ खूब पड़ती है। गर्मियों की छुट्टियाँ तो अभी आनी ही है और भी बहुत छुट्टियाँ होती है। उम्मीद है कि मै स्कूल की छुट्टियों का सही इस्तेमाल कर के कॉमिक्स स्कैनिंग और अपलोड में थोड़ी तेज़ी ला पाउँगा बाकी तो सब समय के हाथ में है।

Friday, April 12, 2013

Star Comics-06-Jaduyi Chirag Aur Adamkhor Ped


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स्टार कॉमिक्स-0६-जादुई चिराग और आदमखोर पेड़
 स्टार कॉमिक्स की मै ये चौथी कॉमिक्स अपने ब्लॉग पर अपलोड कर रहा हूँ। वैसे तो स्टार कॉमिक्स की मैंने कई कॉमिक्स अपलोड की है पर ब्लॉग पर सिर्फ तीन ही है। अगर मै अपनी बात करूँ तो स्टार कॉमिक्स को मै ज्यदा तो पसंद नहीं करता। पर इनकी मुंशी प्रेमचंद जी की कहानियों को जो कॉमिक्स के रूप में छापा है उसका कोई जबाब नहीं है। उस सिरीज़ में कुल ४ कॉमिक्स छापी गयी है जिनमे है "ईदगाह","पन्च परमेश्वर",बेटों वाली विधवा" और "पूश की रात". इनमे से तीन कॉमिक्स मैंने खुद अपलोड की है और एक जहीर भाई (पूश की रात) ने अपलोड है और ये सारी कॉमिक्स नेट पर मिल जानी चाहिए।
ये सारी कॉमिक्स मेरे पास है और मै इन्हें दुबारा अपलोड करने की सोच रहा हूँ और जब भी समय मिलेगा जरुर दुबारा स्कैन करूँगा। फिलहाल आप इस बेहतर कहानी का आनंद मै आप सब से फिर नयी कॉमिक्स के साथ दुबारा मिलता हूँ।

Wednesday, April 3, 2013

IndrajaalC-Vol-25-05-Masum Gunahgar


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इंद्रजाल कॉमिक्स-Vol -25-05-मासूम गुनाहगार
 एक और बहुत ही बेहतर कॉमिक्स अनजान लोक का फ़रिश्ता "आदित्य" सिरीज़ की। जैसा की आप ने इस से पहले अपलोड कॉमिक्स "सुलगता पाप" में पढ़ा होगा की कहानी बहुत ही सरल होने के साथ बहुत ही दिल को छूने वाली होती है,उस कॉमिक्स में युवा के नशे को लेकर समस्या पर बड़े प्यार से लिखी गयी कहानी थी। बहुत ही सरल और सीधे तरीके से।
 अनजान लोक का फ़रिश्ता "आदित्य" की कॉमिक्स सबसे बेहतर बात जो मुझे लगता है वो ये है कि ऐसा लगता है की जैसे ये अभी कुछ देर बात कही जाते हुवे हम को मिल जायेगा। हर आदमी में उसकी परछाई नज़र आने लगती है।
 ये कहानी भी कुछ वैसे ही है इस कॉमिक्स में लेखक ने बड़े ही सरल तरीके युवाओं के अकेलेपन और उस अकेलेपन में कारण भटकने की बात को दर्शाता है। पर ये भटकाव इतना ज्यदा भी नहीं है कि वो अपनी मौलिक अच्छाई को पूरी तरह से भूल गया है। इस कहानी को पढने के बात आप कुछ ऐसा सुकून महसूस करेंगे की कहना ही क्या। आप इस बेहतर कॉमिक्स और कहानी का आनंद ले फिर जल्दी ही दुबारा मिलता हूँ।

Thursday, March 28, 2013

LotPot No. 122


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लोटपोट नंबर-122
सच कहूँ मैंने कभी भी लोटपोट अपलोड करने के बारे में नहीं सोचा था। कारण आसान सा है एक तो ये हिंदी पत्रिका अभी भी प्रकाशित हो रही है और दुसरे मुझे एक पत्रिका बिलकुल भी पसंद नहीं है। और जो चीज़ आप को पसंद न हो उसका आप के पास होना भी बहुत मुश्किल होगा। पर ये लोटपोट 200 नंबर से नीचे की है जो की मिलना बहुत मुश्किल है मैंने इनसे पहले कभी भी 200 नंबर से नीचे की लोटपोट नहीं देखी थी तो दिल नहीं माना और इन्हें खरीद लिया और फिर इन्हें उपलोड कर रहा हूँ उम्मीद है आप सब को ये बेहद पुरानी पत्रिका पसंद आएगी।
 आज बात पिछली बार उपलोड की इंद्रजाल कॉमिक्स पर कर ली जाये,ज्यदातर लोगो को इंद्रजाल कॉमिक्स पसंद आई और मुझ से इस बात की आशा की जाने लगी है की मै हिंदी इंद्रजाल में जो भी कॉमिक्स इन्टरनेट पर उपलोड नहीं है उन्हें उपलोड करने की कोशिश करूँ। मैंने अपने पहले पोस्ट में ये बात रखी थी की मै इंद्रजाल कॉमिक्स का संग्रह नहीं करता इसलिए उसकी सारी कॉमिक्स अपलोड करना मेरे लीये संभव नहीं होगा। कितनी अजीब बात है जो लोग इंद्रजाल कॉमिक्स के संग्रह के नाम पर लाखो रूपये पानी की तरह बहा चुके है ये बहा रहे है वो इनको हमेशा के लिए संग्रह (डिजिटल फोर्मेट) करने के लिए कुछ भी करने को तैयार नहीं है और जो मेरी तरह हिंदी कॉमिक्स में कुछ भी संग्रह करने को तैयार है उनके लिए इन कॉमिक्स को खरीदना असंभव बना दिया है। मेरे बस का तो 1-300 नंबर तक की कॉमिक्स खरीदना तो बिलकुल भी नहीं है, फिर भी जो मेरे पास है जैसा की मै हमेशा करता हूँ उन्हें अपलोड कर दूंगा और उम्मीद करूँगा की बाकी कोई और निस्वार्थ आदमी अपलोड कर देगा। मनोज कॉमिक्स की बात कुछ और थी एक तो वो मुझे खुद पसंद है दुसरे वो बहुत ज्यदा महंगी नहीं है और तीसरे मनोज कॉमिक्स के ज्यदातर संग्रहकर्ता इंद्रजाल कॉमिक्स के संग्रकर्ता की तरह अहम् के मारे नहीं है इसलिए हम उसे पूरी तरह अपलोड करने में सफल हो जायेंगे और लगभग हो ही गए है। पर इंद्रजाल कॉमिक्स का भविष्य संग्रह के नाम पर तो मुझे अंधकारमय ही लगता है। बाकी जैसी ईश्वर मर्जी।

Monday, March 25, 2013

Indrajaal Comics-Vol.24-28-Sulagta Paap



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इन्द्रजाल कॉमिक्स-सुलगता पाप (अन्जान लोक का फ़रिश्ता "आदित्य")
जैसा की मै आप लोगो को पहले ही बता चूका हूँ, कि इंद्रजाल कॉमिक्स का शौक मुझे कभी भी नहीं रहा और आज भी कुछ नया नहीं है,फिर भी मेरे पास 300 के लगभग (हिंदी/अंग्रेजी मिला कर) इन्द्रजाल कॉमिक्स होगी।पर मैंने इन्हें कभी पढने की कोशिश नहीं की,कारण इन कॉमिक्स के चित्र और उनकी छपाई और शायद उससे बड़ी बात ये होगी कि इनकी ज्यदातर कॉमिक्स भारतिए परिवेश की नहीं है और मै शहर में रहने के वाबजूद भी अपने गावं से कभी अलग नहीं हो पाया, मेरा देशीपन मुझे इन कहानियों के करीब कभी भी नहीं जाने दिया। और मुझे इन कॉमिक्स कि कहानिया कभी भी समझ में नहीं आई,"बहादुर" की कॉमिक्स शायद मुझे उस समय नहीं मिली होंगी नहीं तो शायद इन्द्रजाल से मेरा थोडा लगाव तो जरुर होता।
 आज भी मै अपने आप को इस सबसे पुराने और बेहतरीन हिंदी कॉमिक्स प्रकाशन से जोड़ नहीं पाता। पर ये जो कॉमिक्स है इस में वो सारी बाते है जो मुझे चाहिए होती है जैसे भारतिए परिवेश और सुन्दर चित्र। चित्र श्री प्रदीप शाठे जी का है और कहानी भी बहुत सरल और बहुत ही बेहतर है पढने के बाद आप अजीब सा शुकून महसूस करेंगे।
 स्कूल के लिए देर हो रही है बाकी बाते किसी और दिन करेंगे तब तक आप सब हो होली की अग्रिम शुभकामनाये।