Wednesday, June 8, 2016

Nutan Comics-Meghdoot aur Akashi Ganga Ke Lutere


Download 14 MB
Download 45 MB
नूतन कॉमिक्स -मेघदूत और आकाश गंगा के लुटेरे
 नूतन कॉमिक्स में मेघदूत,भूतनाथ,छुटकी आंदि प्रमुख चरित्र थे। इस प्रकाशन के बारे में बहुत अच्छी जानकारी अनुपम अग्रवाल जी ने अपने ब्लॉग पर दिया है जिसका लिंक मैं यहाँ दे रहा हूँ। Nutan Chitrakatha
 मेघदूत एक ऐसा चरित्र है जो की अंतरिक्ष के खोज पर निकला है और  उसी यात्रा में जो सभ्यताएं टकराती है उनकी रोचक कथाएं है। वैसे तो डायमंड कॉमिक्स में फौलादी सिंह भी कुछ ऐसा ही चरित्र था। दोनों में मुख्य अंतर ये था की मेघदूत पूरी तरह से सफर पर था और फौलादी सिंह सिर्फ किसी कारण से ही धरती से बहार जाता था।  दोनों की कहानियाँ बहुत ही अच्छी होती थी। मेघदूत चरित्र का निर्माण भी श्री  परशुराम शर्मा जी ने किया था जिनकी देन नागराज,विनशदूत, भेड़िया,अंगारा आदि है। हाँ बाद में मेघदूत की कहानियाँ मुख्यता श्री  योगेश मित्तल जी ने लिखी। अंतरिक्ष कथाओं को लगभग सभी प्रकाशनों ने खूब भुनाया है। मनोज कॉमिक्स में राम -रहीम को शुरू में खूब दूसरे ग्रहों  पर घुमाया है और बाद में तो आकोश को  तो दूसरे ग्रह से आया ही बताया गया था। कुछ भी हो दूसरे ग्रह हमें शुरू से बहुत लुभाते है मुझे तो अंतरिक्ष के बारे में पढ़ने और जानने में बड़ा मज़ा आता है।
कहानी के लिहाज़ से ये कॉमिक्स बहुत अच्छी है इस कॉमिक्स के बारे में जयादा जानकारी तो मेरे पास नहीं है पर शायद ये तीन पार्ट की कहानी है जिसके दोनों पार्ट अपलोडेड है जिनको मैंने यहाँ पर भी अपलोड कर दिया है ये बचा था जो मैं आज अपलोड कर रहा हूँ।
क्योंकि मुझे इसके पूरे  पार्ट के बारे में सही जानकारी नहीं है तो अगर किसी के पास इसकी पूरी जानकारी हो तो उसे यहाँ जरूर बताये की इस कॉमिक्स के कितने पार्ट है कितने अपलोडेड है और कितने अभी अपलोड होने है। वैसे मुझे लगता है की इसके तीन पार्ट है जो की सभी अपलोडेड है। इसलिए मैंने मेघदूत की जो भी कॉमिक्स सॉफ्ट कॉपी में मेरे पास थी वो मैंने यहाँ अपलोड कर दिया है।
भूतनाथ की भी जो कॉमिक्स मेरे पास सॉफ्ट कॉपी में  है वो सारी भी यहाँ अपलोड कर रहा हूँ। जो की मेरी स्कैन की हुयी नहीं है। उन सभी अपलोड करने वाले बंधुओं को जरूर धन्यबाद दें।
मनोज कॉमिक्स जो की मैं सेट वाइज अपलोड कर रहा था उसका सेट न . १०५  पूरी तरह से तैयार है जो की जल्दी ही अपलोड हो जायेगा।  सारी मनोज कॉमिक्स मैंने संख्या बाध्य कर ली है ज्यादा तर कॉमिक्स तो मेरे पास है इसलिए मनोज कॉमिक्स को सेट वाइज अपलोड करने में अब कोई मुश्किल नहीं चाहिए। उम्मीद करता हूँ २०१७ तक ये काम ख़त्म हो जायेगा। 

Nutan Comics-19-Meghdoot Aur Azadi Ke Matwale

Nutan Comics-228- Meghdoot Aur Superman

Nutan Comics-194- Meghdoot Aur Antriksh Ki Ganga

Nutan Comics-016-Meghdoot Aur Chauthai Suraj Ka Narak

Nutan Comics-74-Meghdoot Aur Mangal Ki Jwaala




Download

Nutan Comics-111-Bhootnath Aur Daulat ka jahar


Download

Nutan Comics-69-Bhootnath Aur Neela Jabda


Download

Nutan Comics-89- Bhootnath Aur Baadlon Ka Jaal


Download

Nutan Comics-103-Bhootnath Aur Haveli ke pret


Download

Nutan Comics-30-Bhootnath Aur Aadamkhor


Download

Nutan Comics-345- Bhootnath Aur Laalchi Baap


Download

Nutan Comics-245-Bhootnath Aur Khooni Killa


Download

Nutan Comics-78-Bhootnath Aur Bauno Ke Desh Main

Sunday, May 29, 2016

Ganga Chitrakatha-04-Sheri Mera Naam


Download 10 MB
Download 53 MB
गंगा चित्रकथा-०४- शेरी मेरा नाम
ये प्रकाशन उन प्रकाशनों में से एक है जिसको मैंने तब पढ़ा जब ये प्रकाशन बंद हो चुके थे वैसे  देखने में ये नूतन व नीलम चित्रकथा की बहने लगती है कहानी और चित्र इतने अच्छे तो थे कि अगर उस समय मिल जाती तो मैं इन्हे खरीद कर जरूर पढता। ९० के दशक का एक ढर्रा था की कॉमिक्स और नवल में जासूस होना चाहिए जो देश के दुश्मनो से लड़ता हुवा देश को बचाए। शेरी भी उन्ही जासूसों में से एक है, कहानी तो बिलकुल वैसे ही है जैसे कर्नल कर्ण की मनोज कॉमिक्स में होती थी। सब एक जैसी पर फिर भी बिलकुल अलग लगना बिलकुल समझ के बहार था। पर इतना जरूर है की इन्हे पढ़कर आप सन्तुष्टी प्राप्त करेंगे।
 आज मैं अपना कॉमिक्स कलेक्शन देख रहा था या कहूं की अलग कर रहा था तो ये देख कर मुझे बहुत ख़ुशी हुयी की मेरे पास अभी भी इतनी कॉमिक्स है जो की बहुत काम लोगो के पास होगी। उन्हें अपलोड करने में (अगर मैं हर रोज़ भी अपलोड करूँ तो भी) ३ - ४ साल में कही जा कर अपलोड हो पाएंगी जो की कही भी अपलोड नहीं होंगी। मतलब अभी बहुत काम पड़ा है।
 आज कल जिस तरह फेसबुक पर लोग कॉमिक्स को लेकर बात करते है ऐसा लगता है बस उन्ही के पास है और किसी के पास कुछ नहीं है। मुझे लगता है ऑरकुट फिर भी ठीक था काम से काम लोग कॉमिक्स अपलोड तो करते है। आज लोग सिर्फ बेचते और खरीदते है। अगर आप सच्चे कॉमिक्स प्रेमी है तो इन्हे बचाने में मदद करें। आप कुछ भी कर लें इन्हे जिंदगी भर संभाल कर नहीं रख सकते। सभी चीज़ों की एक उम्र होती है तो कागज़ की भी होगी। कितना भी सम्भाल लो कागज़ को सड़ ही जाना है। उसे डिजिटल फॉर्मेट में लाइफ टाइम करने के लिए मेरे जैसे लोगो की मदद करें।  जिससे हमारा बचपन हमेशा ले लिए जिन्दा रहे।
विचार कीजिये जो मेरे पास है उन्हें तो मैं किसी भी हालत में अपलोड करके बचा लूंगा पर जो मेरे पास नहीं है उसके लिए तो मुझे फिर लोगो की मदद तो चाहिए ही होगी। जितना संभव हो इसमें मेरी मदद करें।

Monday, May 23, 2016

Goyal Comic-32-Akal Ke Andhe




Download 10 MB
Download 35 MB
गोयल कॉमिक्स - ३२ - अक्ल के अंधे 
गोयल कॉमिक्स को मैंने तब पढ़ा था जब राज और मनोज कॉमिक्स राज कर रहे थे इसलिए उस समय इसे ज्यादा पढ़ने का मौका तो नहीं मिला था फिर भी 
यंग मास्टर, चाचा चम्पक लाल मुझे बहुत पसंद आया करता था। वैसे तो मुझे ये बिना हीरो वाली कॉमिक्स पढ़ने में मज़ा नहीं आता था। मेरे समय में तो सुपर हीरो कॉमिक्स का बोलबाला था और मैं इन्हे बहुत पढ़ना पसद करता था। बिना सुपर हीरो की कॉमिक्स मेरे लिए बेकार हुवा करती थी वो तो बाद में पता चला की बिना सुपर हीरो वाली कॉमिक्स कही बेहतर हुवा करती थी। ये कॉमिक्स भी किसी भी सुपर हीरो की नहीं है बस एक सीधी साधी हास्य कॉमिक्स है और सच कहूं तो आप ने चाहे कितने भी बाकेलाल और हवलदार बहादुर पढ़े हो।  इस कॉमिक्स  को आप बिना हसे पूरा नहीं कर सकते। पढ़ कर देखे मज़ा आएगा। 
गर्मियों की छुट्टियां शुरू हो गयी है।  अब मेरे पास भी कुछ  अपलोड करने का समय है। उम्मीद  है की मैं इन छुट्टियों में ज्यादा कॉमिक्स अपलोड कर पाउँगा। 
नया स्कूल ज्वाइन किया था तो सेक्शन ब्रेक का पैसा नहीं मिलेगा (पहले साल छुट्टीओं का पैसा स्कूल नहीं देता है ) वो एक परेशानी मेरे लिए जरूर है। पर  कुछ न कुछ रास्ता तो निकल ही आएगा। अभी स्कूल को लेकर भी मैं पूरी तरह निश्चिंत नहीं हूँ।  एक तो नया स्कूल है दूसरे मेरी छटी इंद्री कुछ खतरे का अहसास दे रही है भगवान् करे सब ठीक हो। बार बार नौकरी बदलना ठीक तो नहीं है। और मेरा ऐसा कोई इरादा भी नहीं है पर देखते है की आगे क्या होता है। 
फिलहाल तो मैं अपने आप कोई विचार विहीन पा रहा हूँ। इसलिए आज इतना ही उम्मीद है अगली बार मेरे साथ ऐसा न हो।  तब तक के लिए विदा। 

Wednesday, March 23, 2016

Manoj Chitrakatha (S)-92-Chirag Ka Pret



Download 10 MB
Download 35 MB
मनोज चित्रकथा-९२- चिराग का प्रेत
 मनोज कॉमिक्स में जो कुछ भी छापा गया है उसकी बात हर मायने में अलग ही होती थी। आज के बच्चो को देख कर अहसास होता है की उनको अपनी सभ्यता के बारे में ना के बराबर पता है। जब हम बच्चे थे तो हमें अपनी सभ्यता से परिचय करवाने वाले ढेरो साधन उपलब्ध थे। जैसे ढेर सारी बच्चो के पत्रिकाएं और कॉमिक्स पर आज ये दोनों ही लगभग गायब है। आज के बच्चो को शेख्सपीयर कालिदास से ज्यादा पता है। रामायण से ज्यादा तो बाइबल के बारे में पता है। हम अपनी सभ्यता को अपने ही हाथो ख़त्म करते जा रहे है। हमें इस बारे में गंभीरता से विचार करने की जरुरत है। पहले हमें सभ्यता की जानकारी पुस्तको से मिल जाती थी पर आज तो उनका भी सहारा ख़त्म हो गया है। मनोज कॉमिक्स के भारतीय सभ्यता के बारे में सबसे ज्यादा कॉमिक्स छापी है। ये कॉमिक्स भी कुछ वैसे ही है। पढ़ने के बाद अजीब सा संतोष होता है। ये कॉमिक्स पहले भी अपलोड की जा चुकी है। जैसा की हम सभी का मानना था की कॉमिक्स जैसी भी कंडीशन में हो उसे अपलोड कर देना चाहिए जिन्होंने ने भी ये कॉमिक्स अपलोड की थी उनके पास स्कैनर नहीं था तो उन्होंने कमरे से फोटो खीच कर अपलोड कर दी थी। जब ये कॉमिक्स मेरे पास आई तो मैंने अब इसे स्कैनर से स्कैन कर के अपलोड करने का मन बनाया और आज ये अपलोड हो रही है।
 आज कल जिस तरह से देश में माहौल बनाया जा रहा है उससे तो ये लगता है की हिन्दू होना एक पाप हो गया है और कही आप ने गलती से अपने धर्म के बारे में कुछ कह भी दिया तो आप तो रावण से बड़े पापी हो गए। मै तो सिर्फ एक बात जानता हूँ की मै जन्म से हिन्दू हूँ और मुझे हिन्दू होने पर गर्व है। मै सभी धर्मो का बराबर आदर करता हूँ जिसमे मेरा धर्म भी शामिल है। जिसको मेरे इस बर्ताव से परेशानी है वो मेरा साथ छोड़ सकते है। जवाहर लाल नेहरू यूनिवर्सिटी में जो हुआ और जो हो रहा है उसे किसी कीमत पर सहन नहीं किया जा सकता। नाम कन्हिया और काम कंस वाले, कहते है आज़ादी चाहिए (आज़ाद हो कर सुवर तो बन गया है ) मुझे शर्म आती है ये सोच कर की मेरे देश में ऐसे सुवर भी पैदा होते है। और इनका समर्थन करने हमारे या कहे पूरी दुनिया के पप्पू भी आते है और  (दूसरे पप्पू ) कहते है की शब्दों से देशद्रोह नहीं होता तो फिर ठीक है आप दोनों सुवर की औलाद हो जिंदगी भर मैला खा कर जीवन बिताया है और आगे भी यही इरादा है,पता नहीं किस सुवर की औलाद हो। गटर में रहने में ही आनंद है। तुम दोनों एक बाप की औलाद हो नहीं सकते। ( इतने शब्द बड़े सयम से लिखे है। वैसे भी जब शब्दों से देश द्रोह नहीं होता तो व्यक्ति द्रोह कैसा ?) पर इस सारे प्रकरण से सारे सुवर एक तरफ हो गए है जिन्हे पहचानना और उन्हें ख़त्म करना आसान हो गया है। इस बार चुनाव आने दो माँ और बेटे में नहीं जीतेंगे।
अभी बहुत गुस्सा है इसलिए लिखना बंद कर रहा हूँ। पर एक बात जरूर लिखना चाहूंगा की अनुपम सिन्हा जी जिनकी मैंने जब से पढ़ना सुरु किया है बहुत इज़्ज़त की है। आज तो मुझे अनुपम जी की तो पूजा करने का मन करता है जिस तरह से उन्होंने देश के बारे में अपने विचार लगातार रखे और आज भी रख रहे है। इस बात से बेपरवाह की कुछ लोग उनसे नाराज़ हो सकते है। और यही विचार मेरे भी खून में दौड़ रहा है जो की आप का ही दिया हुवा है। देश के आगे कुछ नहीं न माँ ,न बाप , गुरु , न बेटा , और न भगवान। मेरे लिए देश ही सबसे ऊपर है।

Friday, January 8, 2016

Prampra Comics-188-_Kahan Gaya Gorilla


Download 10 MB

Prampra Comics-182- Main Gorilla


Download 10 MB

Prampra Comics-154-Baajula Ka Kahar


Download 10 MB

Prampra Comics-142 Maut Ka Chakravyuh


Download 10 MB
Download 45 MB
परम्परा कॉमिक्स-१४२ -मौत का चक्रव्यूह जैसा की इस से पहले वाले अपलोड में कह चूका हूँ की ये कहानी पहले खींची गयी और फिर इस कॉमिक्स में जल्दी से खत्म कर दी गयी। उस लिहाज़ से ये कॉमिक्स कुछ निराश करेगी। पर चित्र बहुत अच्छे बने है और पहली दो कॉमिक्स का आखरी पार्ट होने के कारण ये कॉमिक्स खास बन जाती है। बाकी अभी मेरे पास कहने को कुछ विशेष नहीं है। नए अपलोड पर जरूर मै आप सब को कुछ अच्छी खबर सुना पाउँगा।

Prampra Comics-137- Gangste Ki Talas



Download 10 MB
Download 45 MB
परम्परा कॉमिक्स-१३७-गैंगस्टर की तलाश
 जैसा की मैंने वादा किया था की ये सीरीज पूरी करूँगा तो संयोग से ये सीरीज आज लगभग पूरी कर दूंगा। इसमें से तीन कॉमिक्स बज़ूका, मै हूँ गोर्रिला और कहाँ गया गोरिल्ला मेरी स्कैन की हुयी नहीं है। जिसको मैंने अपने एक मित्र से कॉमिक्स पेन ड्राइव में लिया था इस लिए उन स्कैन और अपलोड करने वालों के नाम बताने में असमर्थ हूँ हाँ मै हूँ गोर्रिला r k o ब्रदर ने स्कैन की थी उस कॉमिक्स में उनका लोगो लगा है।
 कहानी के लिहाज़ से पहली सीरीज ठीक ही है पहले तो कहानी के इतना विस्तार कर दिया फिर जैसे उन्हें लगा की सीरीज बहुत लम्बी हो जाएगी तो फटाफट ख़त्म कर दिया। इसलिए मुझे तो कहानी कुछ अधूरी सी लगी। फिर भी देखा जाये तो कहानी ठीक है।
 और दूसरी सीरीज अभी अधूरी है और मेरे पास "फिर आया गोर्रिला" मेरे पास नहीं है अगर किसी के पास हो तो उसे जरूर उपलोड करें।
अभी तो फिलहाल मेरी जिंदगी पटरी से उतरी हुयी है। बेरोज़गार होना भी बहुत बड़ी मुशीबत है। वैसे तो देखा जाये तो पैसे को लेकर मुझे परेशानी नहीं है।  एक तो मुझे किसी भी चीज़ की लत नहीं है दूसरे मेरे पिता जी अभी जॉब में है और हमारा अपना मकान है तो उसका भी कोई खर्चा नहीं है। घर का सारा खर्चा भी पिता जी ही उठाते है तो उसको भी लेकर मुझे कोई चिंता नहीं है।  ऊपर से मैं होम टूशन से लगभग ३५ हज़ार कमा लेता हूँ। जो की मेरे लिए बहुत है। पर मैंने अभी तक घर पर किसी को नौकरी से निकले जाने के बारे में बताया नहीं है तो मुझे बच्चे को लेकर स्कूल जाना पड़ता है उसको स्कूल में छोड़ कर फिर कही गाड़ी खड़ी करके इंतज़ार करना बहुत खलता है। बहुत बार दिल किया की घर पर बता दूँ पर न बताना मुझे ज्यादा ठीक लग रहा है। पहला कारण जब मुझे पैसे को लेकर कोई परेशानी नहीं है तो घर वालो को बता कर परेशान करने का कोई तुक नहीं बनता दूसरा जो ज्यादा बड़ा कारण लगता है वो ये है की अगर मैंने घर पर बता दिया तो फिर मुझे घर से सुबह निकलने का कारण ख़त्म हो जायेगा फिर मै घर पर ही रह जाऊंगा तो फिर नौकरी कौन ढूंढेगा।  घर से निकलने की मज़बूरी के कारण नौकरी मिलने की   सम्भावना ज्यादा प्रबल हो जाती है। वैसे दो तीन स्कूल में बात चल रही है उम्मीद है जल्दी ही कुछ अच्छी खबर मिलेगी। 

Saturday, October 10, 2015

Parampara Comics-132-Gorilla



Download 10 MB
Download 45 MB
परम्परा कॉमिक्स -१३२-गोर्रिला
 परम्परा कॉमिक्स उन कॉमिक्स प्रकाशन में से था जिन्होंने कॉमिक्स प्रकाशन का कार्य तब शुरु किया था जब कम्प्यूटर युग का आवागमन हो चूका था और कॉमिक्स युग अपने चरम पर था। पर इस प्रकाशन ये कॉमिक्स छापने का कार्य पुरे लगन और ईमानदारी से किया था उस समय के बाकी प्रकाशकों की तरह इनका ध्यान सिर्फ कॉमिक्स छापने पर ही नहीं था बल्कि कॉमिक्स की गुडवत्ता पर पूरा ध्यान भी दिया था। इनकी कॉमिक्स की कहानियों और चित्रो में नयापन था। उस समय के कई अच्छे लेखकों जैसे हनीफ अज़हर जी ने इस प्रकाशन के साथ काम किया था। अगर कॉमिक्स युग इस प्रकासन के आने के कुछ समय बाद ही न खत्म हो गया होता तो हम आज मनोज कॉमिक्स की तरह इस प्रकाशन की कॉमिक्स भी ढूढ़ते।
 इस प्रकासन की कुल मिला कर १५ ० से २०० के बीच आई होंगी। इस प्रकाशन ने अपनी कॉमिक्स का नंबर १०१ से शुरु किया था इस लिहाज़ से ये कॉमिक्स १३२ वी न होकर ३२ है। गोर्रिला सीरिज की दो कॉमिक्स छोड़कर बाकी सारी कॉमिक्स मेरे पास है जिसे मै अपलोड कर दूंगा। बची दो कॉमिक्स मेरे और मित्र जरूर अपलोड कर देंगे। ये गोर्रिला सीरीज की ओरिजिन सीरीज है जिसमे १ - गोर्रिला , २-गैंस्टर की तलाश।,३- मौत का चक्रव्यूह है। ये सारी कॉमिक्स मेरे पास है जिन्हे मै जल्द ही आप सब के लिए अपलोड कर दूंगा।
 जिंदगी में कुछ सही-सही नहीं घट रहा है, समझ में नहीं आ रहा है की मुझे क्या करना चाहिए और क्या नहीं। सब कुछ समझ के परे नज़र आ रहा है। इतना असहाय मैंने अपने आप को बहुत कम ही पाया है। कोई इतना अनैतिक कैसे हो सकता है और फिर जिनको लोगो पर को लोगो नैतिक बनाने की जिम्मेदारी है वो इस आनैतिका को बढ़ावा दे रहे है और जो इस आनैतिका उजाकर करा था आज वो सबसे ज्यादा खतरे में नज़र आ रहा है।
 कई लोगो ने मुझ से कहा है की मुझे कहानी लिखनी चाहिए। ये काम मेरे बस के बाहर की है फिर भी आज मै ये कोशिश करूँगा शायद मेरे मन की बात इसी तरह से मेरे अंदर से बाहर आ जाये जो मै सीधा नहीं कह सकता।
 ये कहानी है दो चौकीदारों की एक रमेश दूसरा सुरेश। दोनों एक ही कम्पनी में काम करते है दोनों का काम बहुत ही जिम्मेदारी की है। कम्पनी के मालिक अपने आप बहुत ईमादार बताते है। उनके पास सूचना आती है की चौकीदार अपना काम ठीक से नहीं कर रहे है और वो उन मज़दूरों से मिल गए है जो चोरी छुपे सामान निकाल के ले जाते है। उसने फैसला किया की सभी चौकीदार अपनी जगह बदल लेंगे,पर रमेश और सुरेश ने अपनी जगह बदले बिना अपनी जगह पर काम कर रहे थे तभी रमेश जब वहां की तलाशी ले रहा था तो उसे मज़दूर का सामान दिखा जिसमे चोरी का सामान था। उसने उस बारे में मज़दूर से बात की जो की तुम्हारे बैग में सुरेश का बैग क्यों है और उसने उसकी सूचना अपने मालिक को दी। मालिक भी भगवान का बनाया हुवा अनोखा नमूना था उसके लिए सुरेश की खुली चोरी मायने नहीं रख रही थी उसके लिए ये बात ज्यादा मायने रख रही थी की तुमने अपनी जगह क्यों नहीं बदली। अगर तुमने अपनी जगह बदली होती तो तलाशी सुरेश लेता तो ये बात कभी सामने नहीं आती। उसे इस बात से कोई लेना देना नहीं लग रहा है की रमेश ने चोरी को उजागर की वो तो बार- बार सिर्फ एक बात कह रहा है की आप ने अपनी जगह क्यों नहीं बदली। ऐसे मालिक के साथ रमेश का काम करना मुश्किल होता जा रहा था। बार -बार ये ख़बरें आती थी की उस गेट के लिए कोई नया चौकीदार ढूढ़ा जा रहा है। वो वेचारा तो ईमानदारी करके फंस गया था। उसने भी नयी जगह नौकरी तलाशना शुरू कर दिया। अब ये तो समय की गर्त में छुपा था की मालिक रमेश को पहले निकलता है या रमेश को दूसरी नौकरी पहले मिलती है या समय के गर्व में कुछ और ही छुपा है। आप सब भी इसके आगे की कहानी को पूरा करने की कोशिश कीजिये अपने तरीके से मै भी इसे पूरा करूँगा अपने समय पर (यानि अगले अपलोड पर ) आज वैसे भी ज्यादा हो गया है फिर जल्द ही मिलते है। . . ,

Wednesday, September 30, 2015

Prabhat Chitrakatha-278-Tiger Aur khunkhar Sherni


Download 10 MB
Download 35 MB
प्रभात कॉमिक्स-२७८-टाइगर और खूंखार शेरनी
 प्रभात कॉमिक्स मैंने अपने समय में न के बराबर पढ़ी है। इसलिए इनके बारे में मेरी कोई पुरानी राय नहीं है। शायद जब मैंने कॉमिक्स पढ़ना शुरु किया था तब मुझे लखनऊ में ये कम ही दिखाई पढ़ती थी और तब न तो इतना पैसा होता था और न तो समय की और ज्यादा कॉमिक्स पढ़ी जाये तो अगर ये मिलती भी होंगी तो भी मेरा ध्यान शायद ही इन कॉमिक्स पर गया होगा। मनोज कॉमिक्स और राज कॉमिक्स के मुकाबले इनका डिस्ट्रीब्यूशन चैनल बहुत कमजोर रहा होगा।
और अगर आज के हिसाब से बात करूँ तो मुझे इन कॉमिक्स से कोई शिकायत नहीं है कहानिया भी अच्छी है और चित्रों को ले कर भी मै बहुत तो नहीं फिर भी सन्तुष्ट हूँ। उस समय मिलती तो शायद मै इनको भी राज और मनोज कॉमिक्स की तरह खूब पढता। अब इन कॉमिक्स का कलेक्शन मेरे पास अच्छा तो है पर उस तरह से नहीं है जिस तरह से मेरे पास मनोज और राज कॉमिक्स है।
 ये कॉमिक्स मैंने आज से चार दिन पहले अपलोड करने के लिए सोचा था और इसे नेट पर अपलोड भी कर दिया था पर कुछ लिखने के लालच में ये कॉमिक्स पोस्ट होने से बचती रही। होता ये है की अगर मै किसी बात तो लेकर बहुत परेशान रहता हूँ तो कुछ भी लिखने से बचता हूँ। कारण सीधा सा है की कुछ भी लिखूंगा तो उस बात की छाप तो होगी ही। और हर सच तो ऐसे सबके सामने पोस्ट तो नहीं किया जा सकता। दुखी तो आज भी बहुत हूँ ,पर पहले से थोड़ा कम। लिखूंगा तो आज भी बहुत कुछ पर सीधा कुछ नहीं होगा। इंसान के जीवन में उसकी परवरिश का बड़ा हाथ होता है। और इस मामले में शायद मै आज के युग के हिसाब से ठीक से कुछ सीख नहीं पाया। एयर फ़ोर्स कैंपस का माहौल बाहर  की दुनिया के माहौल से बिलकुल उल्टा है। वहां सब नियम कानून से होता है और बाहर  बस एक ही नियम है की कोई नियम नहीं है। मैंने बहार के माहौल से जितना तालमेल अपने को दूषित किये बना सकता था बनाया है। पर जब समुन्द्र पार करना है तो गीला तो होना ही पड़ेगा। आप कुछ भी करें अगर उस बात से कोई सीधा सरोकार न हो तो मै कुछ नहीं बोलूंगा। पर अगर आप के कारण  मेरी ईमानदारी संदेह के घेरे में आती है तो फिर मै चुप नहीं रह सकता। कुछ ऐसा ही इस समय मेरे साथ हो रहा है. इस समय तो कुछ ऐसा माहौल बना हुवा है उसे तो देखकर ऐसा लगता है की जैसे मैंने सच बोल कर कोई बहुत बड़ा अपराध कर दिया है। मै स्कूल में पढता हूँ और मेरे लिए स्कूल एक मंदिर है मै वहां पूजा करने जाता हूँ। हो सकता है स्कूल लोगो के लिए बिजनेस सेंटर हो पर मेरे लिए तो एक मंदिर ही है और हमेशा रहेगा।
अब तो सबसे बड़ा सवाल मेरे लिए ये बन गया है की क्या मुझे सच बोलने की सजा मिलेगी। अगर मिलती है तो भी मै अपने आप को बदलने वाला नहीं हूँ। दुबारा ऐसा कुछ दिखेगा तो भी मै यही करूँगा तो इस बार किया है कीमत कितनी बड़ी ही क्यों न चुकानी पड़े। वैसे जहाँ तक मै समझता हूँ , सच से बड़ी चीज़ कोई हो नहीं सकती और सबको दिख ही जाता है और दिख भी रहा है। और जो ७५ साल की उम्र के हों उन्हें सच पहचने का तज़ुर्बा मेरे सच बोलने से ज्यादा है। बाकि जिसके घर में आग लगी है बुझानी तो उसे ही पड़ेगी मै सिर्फ आप की मदद ही कर सकता हूँ अब ये आप के ऊपर की आप मदद करने वाले का साथ देते है या आग लगाने का। ये आप को ही देखना है। मैंने अपना काम पूरी सिद्दत और ईमानदारी से की है और आगे भी करता रहूँगा।
 ज्यादा लिखना मेरे बहकने का कारण बन सकता है इसलिए आज इतना ही।
 कॉमिक्स के कहानी कुछ इस तरह से है की एक खूबसूरत बार डांसर के पीछे एक रहीसजादा पड़ता है। फिर उसके बाद उसकी जो गत होती है उसके बारे में किसी ने सोचा भी नहीं होता है। वो पागल बना दिया जाता है। बात इस इतनी सी है या कुछ और ? ये कुछ दिख रहा है वो सच है या फिर राहिशजदा तो मोहरा था असली निशाना कोई और ? इन बातों का पता तो आप को कॉमिक्स पढ़ने के बाद ही लगेगा। फिर मिलते है जल्द ही …